उलझा हुआ प्यार
दर्द बढ़ता गया और वो बढ़ता गया,
इश्क़ का यूँ ख़ुमार मुझपर चढ़ता गया।
उसने तो लिखा था नफ़रत-ए-दास्तां,
प्यार का खत समझकर मैं पढ़ता गया।।
गैरों को वो अपना बताता रहा,
इश्क़ तुमसे नहीं ये जताता रहा।
जिसको चाहा था हमने वो समझ न सका,
बस वक़्त-बे-वक़्त हमको सताता रहा।।
इम्तिहाँ की भट्ठी में यूँ झोंको ना,
आने दो अपने दिल को यूँ रोको ना।
होती न मोहब्बत तो क्यूँ इबादत करते,
भरोसा करके तुम हमपर तो देखो ना।।
इस जहां में न जाने कहा खो गए,
दुनिया की नजरों में वो मेरे हो गए।
आजतक उसने मुझसे कुछ कहा ही नहीं,
अब कहा जब मेरे सात फेरे हो गए।।
~~~~बालकवि जय जितेन्द्र
रायबरेली (उत्तर प्रदेश)
क्या लिखा है दिल को छू गया भाई।
ReplyDelete