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अवधी विवाह गीत

कन्यादान  करें  हैं  बाबा,  बिटिया दहेज का उपहार हो। चुटकी भरि सिन्दुरा के कारन, बिटिया  पराई  हमार  हो।। जउने अँगनवा खेली हो बिटिया, वह   सूना   करि   जई   हो। कुछ बेरिया के बाद हो बिटिया, अपने   घर   का   जई  हो।। जउने देश मा रहेऊ बिटिया, हमका  ना  देहूँ  बिसारि  हो। सब कोऊ भवा पराया हो बिटिया, पिया  बसि  भये  तुम्हारि  हो।। सासु ससुर ते मिलिके रइहौ, वई  माई-बापू  तुम्हार  हो। ननद के साथै हँसिहौ खेलिहौ, वई बहिनी अब तुम्हार हो।। हँसि-खेली के प्यारी हो बिटिया, ज़िन्दगी  आपन  काटेव  हो। सुखवा मिलै चाहे दुखवा मिलै, पियाजी  के  संगे बाटेव हो।।           - बालकवि जय जितेन्द्र             रायबरेली(उत्तर प्रदेश)

उलझा हुआ प्यार

दर्द बढ़ता गया और वो बढ़ता गया, इश्क़ का यूँ ख़ुमार मुझपर चढ़ता गया। उसने तो लिखा था नफ़रत-ए-दास्तां, प्यार का खत समझकर मैं पढ़ता गया।। गैरों को वो अपना बताता रहा, इश्क़ तुमसे नहीं ये जताता रहा। जिसको चाहा था हमने वो समझ न सका, बस वक़्त-बे-वक़्त हमको सताता रहा।। इम्तिहाँ की भट्ठी में यूँ झोंको ना, आने दो अपने दिल को यूँ रोको ना। होती न मोहब्बत तो क्यूँ इबादत करते, भरोसा करके तुम हमपर तो देखो ना।। इस जहां में न जाने कहा खो गए, दुनिया की नजरों में वो मेरे हो गए। आजतक उसने मुझसे कुछ कहा ही नहीं, अब कहा जब मेरे सात फेरे हो गए।।                     ~~~~बालकवि जय जितेन्द्र                    रायबरेली (उत्तर प्रदेश)

सावन की यादें

आये बादल घटा है छाई, पवन मचाये शोर है। पंछी गाते भँवरे गुनगुनाते, और नाचे मोर  है।। बारिश आई झमझम करती, सावन  का  महीना है। इस सावन में जो न भीगा, क्या मरना क्या जीना है।। बारिश की रिमझिम बूँदों में, देखा तेरा भीगा बदन। देखकर तेरी तरसी निगाहें, बहक उठा मेरा तनमन।। सर्दी गुरनम बहकी हवायें, मन विचलित कर बैठा हूँ। आ जाओ ख्वाबों में मिलने, कबसे प्यासा मेरा मन।। सावन की बूँदे पड़ीं जब, तब इस बदन में आग लगी। मिलना तुझसे नहीं है मुमकिन, फिर भी मन में आस जगी।। सावन है या कोई जादू , बिन खिंचे चला मैं जाता हूँ। बैठा हूँ दरिया के भवँर में, फिर भी इस दिल मे प्यास लगी।।                                    -बालकवि जय जितेन्द्र                                     रायबरेली(उत्तर प्रदेश)

कोरोना से क्या रोना

मर गए न जाने कितने मजदूर पैदल चलकर, तब कहां गए थे गरीबों से वास्ता रखने वाले। हम तो मजदूर थे हमारा क्या कसूर था, जो आकर मार डाला विदेशों में नास्ता करने वाले।। एक पल  में  अपने-पराये  की  पहचान  करा  दी, जो आजतक न समझ पाये वो हर बात सिखा दी। यह कोरोना नहीं जीवनशैली बतलाने वाला चिराग है, जो एक चुटकी में अच्छे-अच्छो की औक़ात दिखा दी।। कोरोना तो यूँ ही बदनाम है दुनिया में, कहीं न कहीं हम भी सब कुसूरवार है। प्रकृति के साथ हम खेलें तो ठीक  है, प्रकृति हमारे साथ खेले तो गुनहगार है।। कोरोना तो बस एक बहाना है, असली मकसद तो हमें सुधारना है। अभी वक़्त है सुधर जाओ वरना, हमसब को ऐसे ही दिन गुजारना है।।                   - बालकवि जय जितेन्द्र       रायबरेली (उत्तर प्रदेश)

भारत माँ की ललकार

भारत माँ की ललकार, कोई खामोश नहीं होगा। देनी पड़ी जो जाँ, तो अफ़सोस नहीं होगा।। किस्मत वाला है वो, जिसे मिले तिरंगा कफ़न। जाँ से प्यारा ये वतन, हम बोले वन्देमातरम।। दुश्मन की क्या औकात, जो बैठा लगाये घात। भारत माँ के रखवाले, रक्षा करें दिन रात।। हम चढ़ जाये शूली पे, पर जगमगाता रहे चमन। दुश्मन के फूटे करम, हम बोले वन्देमातरम।। उड़ा दो चीथड़े, दुश्मन न बचे साबूत। खड़ा करो सरहद पर, जो मांगे तुमसे सबूत।। मिट जाये ये बदन, पर बचे न दुश्मन। अमर रहे ये वतन, हम बोले वन्देमातरम।। कि देश है पहले, बाकी सब है बाद। हम न रहें तो क्या, ये देश रहे आबाद।। है सैनिक की आवाज़, है देश की आवाम। दुनिया विश्वगुरू कहे, हम बोले वन्देमातरम।।                           - बालकवि जय जितेन्द्र                   रायबरेली (उत्तर प्रदेश)